श्वान-प्रेम की अलख जगा रहे 'डॉगमैन' वीरेन

April 28 2018

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आज से 20 साल पहले कुत्ते बेचकर करियर बनाने की बात पर हंसने वालों की कमी नहीं थी, लेकिन आज यही कारोबार 2,500 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर गया है। देश में इस कारोबार की नींव रखने वाले वीरेन शर्मा कहते हैं कि वह जानवरों के प्रति समाज में घट रही संवेदनशीलता को लेकर जागरूकता लाने का प्रयास कर रहे हैं। 

इस क्षेत्र में 20 साल का अनुभव रखने वाले वीरेन को 'डॉगमैन ऑफ इंडिया' भी कहा जाता है। वह दुनियाभर में 300 से ज्यादा डॉग शो कर चुके हैं और इस क्षेत्र से जुड़े ताजा रुझानों का आकलन करने के लिए चार महाद्वीपों की धरती नाप चुके हैं। 

'डॉगमैन' वीरेन शर्मा ने इस क्षेत्र से जुड़ने के सफर की शुरुआत के अनुभवों को आईएएनएस से साझा करते हुए कहा, "कुत्तों के प्रति मेरा लगाव और प्यार विरासत में मिला है। मेरे पिता को भी कुत्तों से गहरा लगाव था। मुझे याद है कि मैं बचपन में आवारा कुत्तों को घर ले आता था और फिर उनकी देखभाल करता था। बस, यहीं से लगाव का यह सिलसिला शुरू हो गया। यह मेरा जूनून बन गया है और फिर मैंने इसे फुलटाइम पेशा बना लिया।"

वीरेन की संस्था आवारा कुत्तों के लिए भी काफी काम कर रही है। वह कहते हैं, "एक संस्था के तौर पर हम अधिक संवेदनशील हैं। मैं इस दिशा में लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर 'अडॉप्टेशन अभियान' करता रहता हूं।"

जयपुर से ताल्लुक रखने वाले वीरेन का गुलाबी शहर में 'पेट होटल' भी है, जो दुनियाभर में खासा लोकप्रिय है। वह पेट रिटेल चेन 'मैड अबाउट डॉग्स' (एमएडी) और 'बाजार डॉट कॉम' के मालिक हैं। 

'डॉगमैन' कहते हैं, "इस क्षेत्र में विस्तार की बहुत गुंजाइश है। देश में किसी अन्य कारोबार की तुलना में इस क्षेत्र में हर साल ग्रोथ 100 फीसदी रहती है, वह भी तब जब यह देश में शुरुआती चरण में ही है। इस तरह का व्यवसाय शुरू करने में आपको डिप्लोमा की जरूरत नहीं होती।" 

अन्य देशों की तुलना में भारत में इस क्षेत्र के भविष्य के बारे में वह कहते हैं, "हाल में टेक साइंस रिसर्च की रिपोर्ट 'इंडिया पेट फूड मार्केट फॉरकास्ट एंड अपॉर्चुनिटीज 2019' में कहा गया है कि इंडियन पेट फूड मार्केट 2019 तक 27 करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर लेगी। एक अन्य शोध 'यूरोमीटर इंटरनेशनल' में इंडिया पेट केयर मार्केट 1,394 करोड़ रुपये बताया गया है, जबकि 2011 में यह 538 करोड़ था। इस तरह इसमें दोगुने से अधिक का इजाफा हुआ है।"

वह कहते हैं, "मौजूदा समय में इंडियन पेट इंडस्ट्री का कुल कारोबार 2,500 करोड़ से अधिक है।"

देश में जानवरों के प्रति असंवेदनशीलता के बारे में पूछे जाने पर वीरेन कहते हैं, "इसके लिए देशभर में जागरूकत फैलाने की जरूरत है। हमें यह समझना होगा कि वे भी उतने ही जरूरी हैं, जितने हम और ये हमारे समाज का हिस्सा है।"

वह कहते हैं, "आंकड़ों के मुताबिक, देश में 2016 तक एक करोड़ आवारा कुत्ते थे, लेकिन लापरवाह ड्राइविंग और असंवेदनशीलता की वजह से इनकी संख्या अब घटकर 40 लाख रह गई है। मैं इस मामले को लेकर बहुत संवेदनशील हूं। जब भी मौका मिलता है आवारा कुत्तों को बचाने में लग जाता हूं। मुझे लगता है कि समाज को इस दिशा में शिक्षित करने की बहुत जरूरत है।"

वीरेन कहते हैं, "विदेशों की तुलना में भारत में इस क्षेत्र को अभी सही से भुनाया नहीं गया है। इसकी ग्रोथ में बड़ा अंतर है। देश में इस क्षेत्र को स्टैंडराइज करने की जरूरत है, तभी हम अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे। 

वीरेन साल 2006 में देश की पहली डॉग वेडिंग कराने में सफल रहे थे। इसकी जरूरत और अनुभवों को साझा करते हए कहते हैं, "उस समय हम मीडिया में खासा हाइलाइट हुए थे। हमें इसके जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। मैं बताना चाहूंगा कि इससे देश में जागरूकता भी आई है कि कुत्तों का वंश बढ़ाने की खासी जरूरत है।" 

आज के समय में डॉग शो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खासा लोकप्रिय हैं, जिन्हें दुनियाभर में देखा जा रहा है। वह कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि इंसानों और कुत्तों में लगाव को दिखाने के लिए इससे बढ़िया जरिया कुछ नहीं हो सकता।" 

  • Source
  • आईएएनएस

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