सरकारी बैंकों का ध्यान फंसे कर्जो पर : आर्थिक सर्वेक्षण

August 13 2017

सरकारी बैंक (पीएसबी) फंसे हुए कर्जो से होनेवाले नुकसान को कम करने पर जोर दे रहे हैं और कर्ज देने के नए अवसरों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं, इसीलिए उनकी कर्ज देने की वृद्धि दर घट गई है। मध्यकालिक आर्थिक सर्वेक्षण में ये बातें कही गई हैं। संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2016-17 भाग-दो में कहा गया है, "समस्या यह है कि सरकारी बैंक फंसे कर्जो की वसूली पर ध्यान दे रहे हैं और नए कर्ज नहीं दे रहे हैं। इससे वे कारोबार के अवसर गंवा रहे हैं। इस तरह वे आर्थिक वृद्धि दर का समर्थन कैसे करेंगे? क्या कदम उठाए जाएंगे कि ऐसी समस्या दोबारा ना हो?"


इसमें कहा गया, "अपर्याप्त मांग ऋण उठाव में कमी का वाजिब कारण नहीं हो सकता, क्योंकि निजी बैंकों की ऋण उठाव में अच्छी वृद्धि देखी जा रही है, जो सरकारी बैंकों से अधिक है।"


मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम द्वारा लिखित सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि फंसे हुए कर्जो का बोझ और अनिश्चितता के माहौल में बैंकों (खासकर सरकारी क्षेत्र के) ने अपने गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) की समस्या पर ध्यान केंद्रित किया है और वे नए ऋण जारी करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।


  • Source
  • आईएएनएस

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