आईएसएल-4 : मौजूदा विजेता-उपविजेता का अब तक का सफर निराशाजनक

December 14 2017

 हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का चौथा सीजन अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है लेकिन अभी तक दो टीमें एक भी जीत दर्ज नहीं कर पाई हैं। यह दोनों टीमें आईएसएल की बीते तीन साल के इतिहास में दो बार फाइनल में पहुंची हैं। पिछले सीजन में इन दोनों के बीच फाइनल खेला गया था। यह केरला ब्लास्टर्स और मौजूदा चैम्पियन एटीके के लिए खराब दौर है। दोनों टीमें अभी तक जीती नहीं हैं और उससे भी अहम दोनों ही गोल करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। दोनों टीमों ने अभी तक सिर्फ तीन गोल किए हैं, लेकिन गोल खाने की बात की जाए तो दोनों ने कुल मिलाकर 13 गोल खाए हैं। मौजूदा विजेता एटीके अंकतालिका में सबसे नीचे है तो वहीं ब्लास्टर्स आठवें स्थान पर है, इस स्थान के लिए उसे तीन ड्रॉ मैचों को धन्यवाद देना चाहिए। इन दोनों टीमों ने ही इस सीजन पर लीग का उद्घाटन मैच खेला था जो गोलरहित ड्रॉ रहा था। 


एक चीज जो दोनों टीमों में समान है, वो दोनों के खेलने की शैली। ब्लास्टर्स ने आगे से दबाव बनाती है और ब्रेक में प्रहार करती है। वहीं दूसरी तरफ एटीके धीरे-धीरे आगे बढ़ती है। इस तरह की दो बार की विजेता ने इस सीजन की शुरूआत की है जो उसके कोच टेडी शेरिंघम बदलना चाहेंगे। वह हालांकि कुछ नए तरीके ढूंढ़ रहे हैं। 


एटीके चार राउंड का खेल खत्म होने के बाद सबसे ज्यादा पास के मामले में पांचवें स्थान पर है। हालांकि दोनों टीमों के बीच जो सबसे बड़ी चिंता है वो मौकों को गोल में न बदल पाना। दोनों ने गोलपोस्ट पर प्रहार तो किए हैं लेकिन उन्हें नेट में डालने में ज्यादा सफल नहीं रही हैं। एटीके ने गोलपोस्ट पर अभी तक कुल 41 शॉट लिए हैं जिसमें से सिर्फ तीन में ही सफलता उसे मिली है। उसका प्रतिशत 7.3 है जो बेहद निराशाजनक है। ब्लास्टर्स का भी हाल लगभग यही है उनका कन्वर्जन रेट 8.8 है।


पहले एटीके के देखते हैं। उनके पास स्तरीय खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। मिडफील्ड में उनके पास कोनोर थॉमस और बिपिन सिंह है। इन दोनों के पास गोल करने के मौके बनाना का पूरा माद्दा है। हालांकि उनके स्ट्राइकर निजाजी कुकी अपनी फॉर्म में नहीं हैं। 


ब्लास्टर्स के मार्क सिफोनेस के नाम कुछ गोल हैं लेकिन एटीके के पास ऐसा कोई खिलाड़ी नहीं है जिसके नाम एक से ज्यादा गोल हो। कुकी ने 10 शॉट लगाए हैं जिसमें से वह सिर्फ एक गोल ही कर सके हैं। उनके भारतीय स्ट्राइकर रोबिन सिंह ने सिर्फ तीन शॉट गोलपोस्ट पर दागे हैं। हालांकि एटीके बैक में काफी मजबूत है। उसने गोलपोस्ट के सामने चार शानदार बचाव किए हैं। ब्लास्टर्स यहां और कमजोर हैं। उन्होंने चार मैचों में 15 बचाव किए हैं। 


मैदान पर जिस धार की जरूरत होती है वो इन दोनों टीमों में अभी तक देखने को नहीं मिली है। दोनों टीमें चोट के कारण अपने अहम खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी की समस्या से जूझ रही हैं। दो बार की विजेता एटीके रोबी कीन की गैरमौजूदगी से परेशान है। यह उनकी निश्चित तौर पर सबसे बड़ी समस्या है। वह इस समय सिर्फ 14 सदस्यों के साथ अभ्यास कर रहे हैं जबकि उसके कई खिलाड़ी प्री-सीजन में लगी चोटों के कारण जूझ रहे हैं। हाल में इस सूची में इयुगेंसन ल्यांगदोहा का नाम शामिल हुआ है। वह तकरीबन एक महीने के लिए मैदान से बाहर हो सकते हैं। 


वहीं ब्लास्टर्स के साथ दूसरा मुद्दा है। उनके पहले दो मैच 0-0 पर समाप्त हुए थे। अगले दो मैचों में उन्होंने शुरूआती 15 मिनट में ही बढ़त ले ली थी, लेकिन मुंबई सिटी एफसी के बलवंत सिंह ने 77वें मिनट में गोल करते हुए उसे बराबरी पर रोक दिया था। वहीं एफसी गोवा ने 5-2 से एकतरफा मात दी थी। जैकीचंद सिंह द्वारा पहले हाफ में दम दिखाने वाली ब्लास्टर्स ने दूसरे हाफ में पूरी तरह से आत्मसमर्पण कर दिया था और तीन गोल खाए थे। 


रेने मेयुलेंसेटीन हो सकता है कि अपने आक्रमण को मजबूत कर दें, लेकिन रक्षापंक्ति में उन्हें काफी कुछ करना है। ब्लास्टर्स ने सिर्फ 102 टैकल किए हैं (इस मामले में वह 10 टीमें में छठे स्थान पर है) और 2,166 टच लिए हैं (इस मामले में वह 10 टीमों की तालिका में नौवें स्थान पर हैं) हो सकता है कि यह महत्वपूर्ण आंकड़े न हों, लेकिन उनके लिए यह चिंता की बात तो है। ब्लास्टर्स को आने वाले मैचों में दिमितार बबार्टोव को कमी खलेगी। ब्लास्टर्स अभी तक इयान ह्यूम की ऊर्जा का पूरा फायदा नहीं उठा पाए हैं। उन्हें मैदान पर अभी अपना दमखम दिखाना बाकी है। 


ब्लास्टर्स के कोच को ह्यूम के बेहतरीन खेल का फायदा उठाना होगा और उनका बेहतर इस्तेमाल करना होगा। उन्हें बॉक्स के अंदर सिफेनोस के लिए गेंद बनानी होगी। 


इन दो टीमों का संघर्ष बताता है कि हीरो आईएसएल में कोई भी टीम कमजोर नहीं है और कोई भी टीम मजबूत नहीं है। 


  • Source
  • आईएएनएस

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