भारत में अधिक फुटबाल अकादमियों, विदेशी प्रशिक्षकों की जरूरत : रॉबर्ट पिरेस

October 06 2018

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फ्रांस की राष्ट्रीय टीम के साथ साल 1998 फीफा विश्व कप का खिताब जीत चुके रॉबर्ट पिरेस का मानना है कि भारत में फुटबाल को बढ़ावा देने के लिए अधिक से अधिक अकादमियों और विदेशी प्रशिक्षकों की जरूरत है। 

पिरेस भारत की प्रतिष्ठित फुटबाल लीग इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) में भी खेल चुके हैं। वह आईएसएल के पहले संस्करण में एफसी गोवा का हिस्सा थे और इस दौरान उन्होंने भारत में फुटबाल की स्थिति को बेहद करीब से देखा। उन्होंने हालांकि कहा है कि अगर उन्हें दोबारा आईएसएल में खेलने का मौका मिलेगा तो वह इसे दोनों हाथों से लपकेंगे। 

पिरेस ने यहां ला-लीगा फुटबाल स्कूल के उद्घाटन से इतर आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा, "मैं अभी भी आईएसएल देखता हूं और अगर मुझे मौका मिला तो मैं एक कोच या मेंटोर के रूप में जरूर वापसी करना चाहूंगा। आईएसएल का मेरा अनुभव बेहद शानदार रहा है। मैं लीग के पहले सीजन में खेला था।"

पिरेस ने कहा, "दिग्गज खिलाड़ियों के भारत आने से देश में फुटबाल को काफी लाभ होगा क्योंकि वह युवा खिलाड़ियों के साथ अपना अनुभव साझा कर सकेंगे और उन्हें बहुत कुछ सिखा सकेंगे। भारत में आपको अधिक फुटबाल अकादमियों और विदेशी कोचों की जरूरत है क्योंकि हम फुटबाल की अपनी फिलॉसफी से इस देश में खिलाड़ियों की बहुत मदद कर सकते हैं। ला-लीगा भी इसमें अहम भूमिका निभा सकता है क्योंकि यह लंबे समय से भारत में काम करे रहे और यह प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को खोजने का माद्दा रखते हैं।"

पिरेस के मुताबिक, "आपको अन्य देशों से भी अनुभव प्राप्त करने की जरूरत है। खासकर स्पेनिश, इंग्लिश, फ्रेंच और इटली के कोच भारतीय फुटबाल को काफी कुछ दे सकते हैं। इन देशों के प्रशिक्षकों की फिलॉसफी और उनका अनुभव बेहतरीन खिलाड़ियों की पहचान कर सकता है।"

आईएसएल के पहले सीजन से ही दुनिया भर के दिग्गज खिलाड़ी इसमें भाग ले रहे हैं, लेकिन कई खिलाड़ी एक सीजन के बाद ही स्वदेश लौट जाते हैं। ब्राजील के साथ फीफा विश्व कप का खिताब जीत चुके रोबटरे कार्लोस भी एक सीजन के लिए ही दिल्ली डायनामोज का हिस्सा रहे और फिर वापस लौट गए। 

यह पूछे जाने पर कि पूर्व खिलाड़ी क्यों इतनी जल्दी भारत से वापस लौट जाते हैं? पिरेस ने कहा, "मैं समझता हूं कि यह खिलाड़ी के उत्साह पर निर्भर करता है। अगर गोवा मुझे फिर से आईएसएल में खेलने के लिए बुलाता है तो मैं जरूर इस लीग का हिस्सा बनूंगा। यह शीर्ष स्तरीय लीग नहीं है लेकिन मेरे जैसे खिलाड़ियों के लिए अहम यह है कि हम अपने अनुभवों को इस देश के युवा खिलाड़ियों के साथ साझा कर पाएं और एक बेहतर खिलाड़ी बनने में उनकी मदद कर पाएं। मैं नही जानता कि रोबटरे कार्लोस के साथ क्या हुआ, शायद वह थक गए हों।"

पिरेस अपने शानदार करियर में इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) के शीर्ष क्लबों में से एक आर्सेनल के लिए भी खेले। वह 2003-04 सीजन में आर्सेन वेंगर के मार्गदर्शन वाली आर्सेनल की टीम का हिस्सा थे। उस सीजन में लंदन स्थित क्लब एक भी लीग मैच नहीं हारी और एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। 

  • Source
  • आईएएनएस

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