रोडरेज मामले में सिद्धू पर फैसला सुरक्षित

April 19 2018

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सर्वोच्च न्यायालय ने पंजाब के पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा दाखिल याचिका पर बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सिद्धू ने 30 साल पुराने रोडरेज के एक मामले में तीन साल की जेल की सजा के खिलाफ याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति जे.चेलमेश्वर व न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने पंजाब सरकार, सिद्धू और उनके चचेरे भाई के वकीलों की बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।


यह घटना 27 दिसंबर, 1988 की है, जब सिद्धू व उनके चचेरे भाई ने एक रोडरेज मामले में गुरनाम सिंह व दो अन्य की बुरी तरह पिटाई की थी। पिटाई के कारण गुरनाम सिंह की बाद में मौत हो गई थी।


राज्य सरकार ने 12 अप्रैल को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा मंत्री को दोषी करार दिए जाने का समर्थन किया। इसने शीर्ष अदालत से कहा कि 65 वर्षीय पीड़ित की सिद्धू के एक ही घूंसे में मौत हो गई।


राज्य ने कहा कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है, जो बताए कि सिंह का दिल का दौरा पड़ने या मस्तिष्काघात से मौत हुई थी। साल 1999 में पटियाला की निचली अदालत ने मौत की वजह दिल का दौरा बताते हुए सिद्धू व उनके चचेरे भाई को दोषमुक्त कर दिया था।


उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2006 में निचली अदालत के फैसले को खारिज कर दिया।


उच्च न्यायालय ने कहा कि सिंह की मौत दिल का दौरा पड़ने से नहीं, बल्कि दिमाग के अगले भाग में चोट लगने से हुई थी। सिद्धू को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए अदालत ने तीन साल जेल की सजा सुनाई।


शीर्ष अदालत ने 2007 में दोषी करार देने पर रोक लगा दी। अदालत ने यह रोक सिद्धू की तरफ से पेश हुए वकील की इस दलील पर दी कि उच्च न्यायालय का निष्कर्ष चिकित्सा साक्ष्यों पर नहीं, बल्कि राय पर आधारित है।


सिद्धू के वकील ने तर्क दिया कि चिकित्सा साक्ष्यों में कमी है और अभियोजन पक्ष के गवाहों ने निचली अदालत के समक्ष अलग-अलग बयान दिए।



  • Source
  • आईएएनएस

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