टैलेंट को हवा देने का सशक्त जरिया है सोशल मीडिया : मैथिली ठाकुर

February 25 2019

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सोशल मीडिया पर अपनी गायकी की बदौलत प्रसिद्धि पा चुकीं मैथिली ठाकुर सुर्खियों में हैं। बिहार के मधुबनी की रहने वाली 18 साल की मैथिली ने पढ़ने-लिखने की उम्र में ही ऊंचाइयों की एक लकीर खींच दी है। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी मैथिली वर्तमान में दिल्ली के द्वारका में अपने परिवार के साथ रहती हैं। 

मैथिली अपने हुनर से देश के विभिन्न राज्यों में संगीत का जौहर बिखेर रही हैं। 

मैथिली ने बताया कि संगीत सीखने में ज्यादा कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ा। दादा-पिताजी से हर रोज सुबह-सुबह रियाज करने का मौका मिलता रहा। ठंड में माता-पिताजी हमें जल्दी उठाकर रियाज के लिए प्रेरित करते थे। हर प्रतिस्पर्धा से पहले ठंडा खाने से हमें परहेज करने का सबक मिला। हालांकि, प्रतियोगिता के बाद हमने सब कुछ खाया-पीया। शुरू में तो हर चीज के लिए दिक्कत उठानी पड़ती है। धीरे-धीरे सब ठीक हो जाता है।

उन्होंने बताया, "सोशल मीडिया अपनी बात कहने का सबसे अच्छा माध्यम है। बशर्ते, उसका सकारात्मक उपयोग किया जाए। हमारे अच्छे उपयोग का परिणाम आज आपके सामने है। टैलेंट को हवा देने का सोशल मीडिया एक सशक्त जरिया है। मेरे लिए यूट्यूब पर भोजपुरी गानों की मांग ज्यादा आती है। मैंने अपनी पहचान को जिंदा रखने के लिए यूट्यूब पर अकाउंट बनाया। अब मैं फेमस हूं।"

मैथिली का मानना है, "सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि मिलना अच्छा लगता है। साथ ही जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। अभी हम लोग जहां हैं, वहां बने रहने की चुनौती है। उस स्तर से नीचे न जाएं, इसके लिये हम प्रयास करते हैं। लोगों के कमेंट्स से मोटिवेशन मिलता है और हम लगातार प्रयास को प्रेरित होते हैं।"

भाषाओं में अश्लीलता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सभी भाषाओं में अश्लीलता है। शब्दों का चयन आपको खुद करना है। आप लोगों को जैसा परोसोगे, वह उन्हें अच्छा लगने लगेगा। लेकिन अगर उन्हें परंपरागत और विरासत वाले संगीत सुनाये जाएं तो वही पसंद आएगा। यही वजह है कि मेरा चयन पुरानी परंपराओं और संगीत पर आधारित भोजपुरी गीत हैं। भोजपुरी में भिखारी ठाकुर जिंदा हैं। मैथिल में विद्यापति जी हैं। इन्होंने भाषा के लिए बहुत काम किया है। इनसे सीखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पुराने संगीत में हर गाने का कुछ ना कुछ मतलब होता था, लेकिन आधुनिक में वह छूट गया है। मैं जो गाती हूं वह पुराने और पारंपारिक हैं। इसीलिए लोग हमें पसंद करते हैं। लोक गायन मुझे बहुत पसंद आया। फोक गीत में हर गाने का मतलब रहता है। 

मैथिली की माने तो संगीत शिक्षा पिताजी से मिली है। उन्होंने कहा, "शुरू में हमें शास्त्रीय संगीत सिखाया गया। फोक से ही क्लासिकल संगीत निकला है। जैसे भोजपुरी और मैथिली किसी राग में बना हुआ है। संगीत को राग में बाधित कर हम गाने का कोशिश करते हैं। क्लासिकल झलक दिखाने का प्रयास करते हैं। पहले, मैं सिर्फ क्लासिकल सिंगर थी। पिताजी की सलाह के बाद मैंने हर विधा में गाना शुरू किया। मैंने बॉलीवुड में हाथ आजमाया। गीत चर्चित हुए। पहचान भी मिली। लोग मुझे पसंद करने लगे। शास्त्रीय संगीत ही, आधार है।"

मैथिली ने बताया, "अपने भाई अयाची को बैठाकर रियाज करवाती हूं। मैं अपने दोनों भइयों के बिना आधूरी हूं। दोनों के सहयोग से मुझे बल मिलता है। वैसे भी यूट्यूब पर मैं अपने भाई अयाची व ऋषभ के साथ लाइव परफॉर्मेंस देती हूं। अयाची की तालियां और ऋषभ का तबला मुझे शानदार संगत देता है।"

लोकगायिका ने कहा कि मैंने अपनी पढ़ाई बहुत अच्छे से की है। संगीत में आने के बाद मार्क्‍स कुछ कम जरूर आए। संगीत किसी पढ़ाई से कम नहीं है। एआरसीडी धौलाकुआं से पढ़ाई कर रही हूं। मेरे हाईस्कूल में 90 प्रतिशत नम्बर थे। 12 वीं में 85 प्रतिशत अंक आए थे। संगीत में ज्यादा रुचि की वजह से अब पढ़ाई कुछ कम हो रही है। फिर भी सबकुछ मैनेज हो जाता है। कॉलेज में सबका सपोर्ट मिलता है।

मैथिली ठाकुर ने बताया कि बचपन से ही संगीत का शौक था। तीन वर्ष की आयु में दादाजी से संगीत सीखना शुरू किया था। इसके बाद पिता रमेश ठाकुर ने इस विरासत को आगे बढ़ाया। अब वे ही हम लोगों को दीक्षित कर रहे हैं। मैं जो कुछ भी जानती हूं, पिताजी (रमेश ठाकुर) की देन है। पिताजी की प्रेरणा से हम इस मुकाम तक पहुंचे हैं। पिताजी ही हमारे गुरु हैं।

उन्होंने बताया कि हमारी मां (भारती ठाकुर) को संगीत सुनने में बहुत रुचि है। बचपन से उन्होंने हमें बहुत सपोर्ट किया है। संगीत सुनना और उसे सकारात्मक दिशा में ले जाने को प्रेरणा देना ही बड़ी बात है। इसी का परिणाम है कि अब मैंने अपने छोटे भाई अयाची ठाकुर को संगीत सिखाना शुरू किया है। वह अच्छा गाने लगा है।

  • Source
  • आईएएनएस

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