मंत्रालय, महासंघ खिलाड़ियों का ध्यान नहीं रखेंगे तो पदक कैसे आएगा : विजेंदर सिंह

January 23 2020

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भारत को ओलम्पिक मुक्केबाजी का पहला पदक दिलाने वाले विजेंदर सिंह ने इसी साल टोक्यो में होने वाले खेलों के महाकुंभ में भारत के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद तो जताई है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि खेल मंत्रालय तथा मुक्केबाजी महासंघ को खिलाड़ियों को ध्यान रखना होगा और उनकी जरूरतों को पूरा करना होगा क्योंकि खिलाड़ियों की जरूरतों के साथ देश का मान भी जुड़ा है।

विजेंदर ने यह बात आईएएनएस से बातचीत के दौरान हाल ही में एशियाई चैम्पियन पुरुष मुक्केबाज अमित पंघल के निजी कोच नियुक्त करने की अपील को ठुकराए जाने पर कही।

जापान की राजधानी में इसी साल ओलम्पिक खेलों का आयोजन होना है और भारतीय मुक्केबाजों से इसमें अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। विजेंदर ने भी माना कि इन ओलम्पिक खेलों में भारत अच्छा कर सकता है लेकिन खेल मंत्रालय और महासंघ को खिलाड़ियों की जरूरतों का पूरा ख्याल रखना होगा।

बीजिंग ओलम्पिक-2008 में कांस्य पदक जीतने वाले इस मुक्केबाज ने आईएएनएस से कहा, "उम्मीद तो काफी है। नई पीढ़ी है। इनमें जोश है। कई मुक्केबााज अच्छा कर रहे हैं। अमित पंघल अच्छा कर रहा है। शिवा थापा अच्छा कर रहा है। इसलिए भारत की उम्मीदें तो अच्छी हैं, लेकिन मैंने हाल ही में कहीं पढ़ा था कि अमित पंघल को पर्सनल कोच चाहिए था लेकिन उसे मिला नहीं। तो इस तरह की समस्याएं खिलाड़ियों को न आएं। खिलाड़ियों के न्यूट्रीशन का, मेडिकल सुविधाओं का अच्छे से ध्यान रखा जाए तो उम्मीदें तो काफी हैं।"

उन्होंने कहा, "महासंघ को भी यहां ध्यान देना होगा, लेकिन महासंघ से ज्यादा खेल मंत्रालय को ध्यान देना होगा। वो ज्यादा अहम है। खेल मंत्रालय बनाया इसलिए गया है कि वो खेलों और खिलाड़ियों का ध्यान रख सके। महासंघ तो बाद में आती है लेकिन मंत्रालय को ज्यादा जिम्मेदारी लेनी चाहिए। लोग किससे सवाल पूछेंगे? खिलाड़ियों से ही पूछेंगे कि पदक क्यों नहीं मिला और सरकार से पूछेंगे। इसलिए मुझे लगता है कि सरकार का दायित्व ज्यादा बनता है।"

विजेंदर से जब पूछा गया कि उनकी नजर में पदक का प्रबल दावेदार कौन है तो उन्होंने कहा कि वह किसी का नाम लेकर उस पर दबाव डालना नहीं चाहते। उन्होंने कहा, "मुझे हर किसी से उम्मीद है। मैं किसी एक का नाम लेकर उस पर पर दबाव नहीं बढ़ाना चाहता। सभी खिलाड़ी अच्छा करें, अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दें मैं यही चाहता हूं।"

विजेंदर अब पेशेवर मुक्केबाजी में कदम रख चुके हैं और यहां उनका रिकार्ड शानदार है। विजेंदर ने अभी तक 12 पेशेवर मुकाबले खेले हैं और सभी में जीत हासिल की। अपने अगले पेशेवर मुकाबले को लेकर उन्होंने कहा, "अगला मुकाबला तकरीबन अप्रैल तक करेंगे क्योंकि अभी हम थोड़े व्यस्त हैं। तो दो महीने ट्रेनिंग कर फिर रिंग में उतरेंगे। अभी मैं कार्डियो ट्रेनिंग कर रहा हूं और फिर कुछ दिनों बाद मुख्य ट्रेनिंग के लिए इंग्लैंड चला जाऊंगा।"

विजेंदर ने 2018 में लोकसभा चुनावों में भी हिस्सा लिया था और कांग्रेस के टिकट से चुनाव भी लड़े थे लेकिन हार गए थे। अभी हाल ही में विजेंदर ट्वीटर पर ज्यादा सक्रिय दिख रहे हैं और देश के तमाम मुद्दों पर चाहें वो सीएए हो या जेएनयू, खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। विजेंदर से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह एक राजनेता नहीं बल्कि आम नागरिक और एक खिलाड़ी होने के नाते अपनी बात रखते हैं।

उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि हर नागरिक को सामने आना चाहिए। मैं सिर्फ खेल से जुड़ा हुआ नहीं हूं। मैं एक पिता भी हूं। पारिवारिक सदस्य भी हूं। किसी का बेटा भी हूं। भारत का नागरिक भी हूं और इस लिहाज से यह मेरा कर्तव्य बनाता है कि मैं उसके लिए बोलूं। कोई भी कुछ भी करे तो मेरा हक बनाता है कि मैं बोलूं।"

विजेंदर उस दौर में मुखर रूप से सामने आकर देश के हालात पर अपनी बात रख रहे हैं जब बाकी कई खिलाड़ी चुप्पी साधे हुए हैं। इस पर विजेंदर ने कहा, "मुझे लगता है कि हर किसी को आगे आना चाहिए। अपनी बात रखनी चाहिए। जो गलत हो रहा है, उस पर आवाज उठाना चाहिए। बाकी खिलाड़ी शायद इसलिए नहीं बोल पा रहे हैं कि शायद वह डरे हुए हैं या उन्हें डराया गया है।"
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  • Source
  • आईएएनएस

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