कैंट क्षेत्रों पर जनसंख्या वृद्धि का दवाब

September 09 2019

देशभर में सैन्य परिवारों को स्वच्छ, शांत और पर्यावरण के अनुकूल परिस्थितियां प्रदान करने के उद्देश्य से सैन्य कैंट स्थापित करने का सिस्टम ब्रिटिश शासन ने स्थापित किया था। सैन्य परिवारों को मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए कैंट क्षेत्र में निश्चित सिविल एरिया भी जोड़े जाते रहे हैं वहीं इन एरिया का प्रबंधन करने वाला बोर्ड स्थानीय जनसंख्या को निकाय तंत्र प्रदान करता है। देश में कैंट अधिनियम 1924 के अंतर्गत 62 कैंट स्थापित किए गए। कैंट क्षेत्रों में नियामक और निकाय क्रियान्वयन उपलब्ध कराने वाले इस अधिनियम के स्थान पर कैंट अधिनियम 2006 लाया गया।


मुख्य शहर से मीलों दूर स्थापित किए गए ज्यादातर कैंट क्षेत्र शांतिपूर्ण और सुखद जीवन का प्रतीक नहीं रह गए हैं, जिसके लिए इन्हें जाना जाता है। सालों की प्रक्रिया में शहर बढ़ गए हैं, उनका विस्तार हो गया है और देश में ज्यादातर कैंटों के चारों तरफ फैल गए हैं। इसके कारण कैंट क्षेत्रों में भीड़, प्रदूषण, जनसंख्या विस्फोट, अतिक्रमण और नागरिक क्षेत्रों का अनियोजित विकास होने लगा है।


रक्षा मंत्रालय से प्रति वर्ष अलग फंड स्वीकृत होने के बावजूद कई कैंट बोर्ड निकाय सेवाओं के निर्वहन के लिए सैन्य सेवाओं पर आश्रित हो रहे हैं।


विभिन्न कैंट बोर्डो में विभिन्न पदों पर काम कर चुके इंडियन डिफेंस एस्टेट सर्विस (आईडीईएस) के पूर्व अधिकारी एकमत हैं कि सिविल एरिया में जनसंख्या वृद्धि और बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण होने के कारण कैंट की शांति छिन गई है।


अपने करियर में 18 कैंटों के बोर्ड में काम कर चुके आईडीईएस के एक सेवानिवृत्त अधिकारी जे.पी. मित्तल ने आईएएनएस से कहा कि जनसंख्या वृद्धि के कारण अवैध निर्माण और पुराने घरों का अनाधिकृत विस्तार हुआ है।


मित्तल ने कहा, "कैंट के अंदर मौजूद सिविल एरिया में सालों पहले काफी कम आबादी थी। लेकिन कई गुना जनसंख्या बढ़ने से जमीन के टुकड़े हो गए हैं। इसके साथ ही, इन सिविल क्षेत्रों में भूमि पट्टे के ट्रांसफर की अनुमति बाहरी व्यक्तियों को है। इसके कारण संपत्तियों का भी बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण हुआ है। रक्षा मंत्रालय सिविल आबादी के लिए अपनी बिना प्रयोग की जमीन छोड़ सकता है और भूमि पट्टा का ट्रांसफर सिर्फ वास्तविक निवासियों को ही मिलने चाहिए।"


बिना किसी नियंत्रण के बड़े पैमाने पर व्यावसायीकरण करने के कारण भी सिविल एरिया में स्थिति बिगड़ गई है।


कई मामलों में सरकार और स्थानीय निवासियों के बीच भूमि पट्टा अनुबंध खत्म हो चुके हैं। पट्टा भूमि को फ्रीहोल्ड संपत्ति में बदलने की सरकार की नीति है।


आईडीईएस के सेवानिवृत्त अधिकारी दक्षिण-पश्चिमी कमान के डिफेंस एस्टेट के पूर्व मुख्य निदेशक अजय कुमार के अनुसार, संपत्ति को फ्रीहोल्ड में बदलने के हजारों मामले मंत्रालय में लंबित हैं।

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  • Source
  • आईएएनएस

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