वेदांता एल्युमीनियम ने लघु फिल्म सीरीज " पीपुल्स ऑफ मेटल" लांच की

January 22 2022

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 देश में एल्युमीनियम और अन्य उत्पाद बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी वेदांता एल्युमीनियम बिजनेस ने अपने संयंत्र के आसपास रहने वाले साधारण लोगों के जीवन पर छह लघु फिल्मों की एक सीरीज लांच की है जिन्होंने अनेक कष्ट सहकर अपने लिए खास मुकाम हासिल किए है। ऐसा करके उन्होंेने न केवल अपनी जिंदगी बेहतर बनाई है बल्कि अन्य लोगों के प्रेरणा स्रोत भी बन गए है।


इन लघु वीडियो के जरिए वेदांता एल्युमीनियम का मकसद ऐसे लोगों के संघर्ष को सामने लाना है जिन्होंेने जी तोड़ मेहनत करते हुए कंपनी के सहयोग से अपनी तथा अन्य लोगों की जिंदगी में बदलाव किए हैं।


वेदांता का एल्युमीनियम गलाने और बिजली संयंत्र का संचालन ओडिशा और छत्तीसगढ़ के दूरदराज के क्षेत्रों में हैं। व्यापक रोजगार के अवसरों, सामाजिक कायों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने ,आवासीय समूहों और संयंत्र के बनाए गए आवश्यक बुनियादी ढांचे ने इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण विकास को बढ़ावा दिया है जिससे इन क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक हुआ है।


इन लघु फिल्मों में कीर्ति चंद्र बोहिदार (पूर्व सैनिक, जो अब एक सफल फ्लाई-ऐश ईंट निमार्ता हैं), पुष्पांजलि सेठ (गृहिणी से उद्यमी बनी और शुभलक्ष्मी को-ऑपरेटिव की पूर्व अध्यक्ष); सीमांचल कद्रका (कभी एक वंचित आदिवासी लड़का, जो अब राष्ट्रीय स्तर का तीरंदाज है); कभी बेहद गरीब रहे पति और पत्नी लेकिन अब सफल किसान कविता और अर्जुन नाइक ; तीन बच्चों की मां और सफल कारोबारी विधवा बसंती और प्रवासी निर्माण मजदूर का काम करने वाले लेकिन अब एक सफल ढोकरा कलाकार बुतरा कंसारी के जीवन संघर्ष को दिखाया गया है।


वेदांता लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अध्ेिाकारी एल्युमीनियम बिजनेस राहुल शर्मा का कहना है वेदांता जिन क्षेत्रों में क्रियाशील हैं वहां उसके आसपास और दूरदराज के क्षेत्रों के समुदायों को देश की आर्थिक प्रगति में सशक्त एवं आत्मनिर्भर भागीदार बनने के लिए उन्हें सक्षम करने का प्रयास करता है। हम महिलाओं और बच्चों के विकास पर विशेष ध्यान देने के साथ स्थायी आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक बुनियादी ढांचे में बदलाव के माध्यम से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन को लगातार प्रेरित करते हैं। हमारी 'पीपल ऑफ मेटल' लघु फिल्म श्रृंखला इन छह व्यक्तियों की अदम्य भावना को दर्शाती है और वेदांता एल्युमीनियम को उनकी यात्रा में भागीदार होने पर गर्व है।


इन छह गुमनाम नायकों की कहानियों का उल्लेख नीचे किया गया है:


ओडिशा में झारसुगुडा के रहने वाले कीर्ति चंद्र बोहिदार सशस्त्र बलों में 18 साल के बाद अपने गांव लौट कर आजीविका के अवसरों की तलाश की। उन्हें पहले ईंट निर्माण एक आकर्षक व्यवसाय की तरह लग रहा था। लेकिन उन्होंने पारंपरिक तरीके से ईंटों के निर्माण करने के बजाए एक स्थायी तरीका खोजने की आवश्यकता महसूस की, जो पर्यावरण के अनुकूल हो और श्रमिकों के स्वास्थ्य को प्रभावित न करे। वेदांता एल्युमिनियम द्वारा प्रदान की गई फ्लाई-ऐश और तकनीकी जानकारी के आधार पर आज वह एक सफल फ्लाई-ऐश ईंट निर्माता है, जो निर्माण को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए कंपनी के औद्योगिक उप-उत्पाद की मदद से पर्यावरण अनुकू ल ईंटों को बनाते हैं।


पुष्पांजलि सेठ ने अपने भाई के परिवार की मदद करने के लिए दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करने से लेकर अपने पति सहारा देकर जीवन भर असंख्य कठिनाइयों का सामना किया था। एक दिन, झारसुगुडा में वेदांता एल्युमिनियम की सीएसआर टीम ने उनसे और क्षेत्र की कई अन्य महिलाओं से संपर्क किया। कंपनी ने उन्हें समझाया कि वह महिला सहकारी समिति का निर्माण कर महिलाओं के कौशल विकास, वित्तीय साक्षरता और उद्यम विकास की दिशा में काम करेगी।


पुष्पांजलि शुभलक्ष्मी को-ऑपरेटिव के 10 संस्थापक सदस्यों में से एक होने से लेकर इसकी अध्यक्ष बन गई थी और उन्होंने 4,000 सदस्यीय मजबूत सहकारी समिति का नेतृत्व कर हजारों अन्य लोगों के भाग्य को बदलने का काम किया। आज वह अपने पति के साथ झारसुगुड़ा में फेब्रिकेशन का एक संपन्न व्यवसाय चलाती है।


अब राष्ट्रीय स्तर के ख्याति प्राप्त तीरंदाज सीमांचल कद्रका का बचपन बहुत गरीबी में बीता था। ओडिशा में कालाहांडी के लांजीगढ़ के रहने वाले इस बच्चे ने बचपन में घोर गरीबी देखी थी और और पिता की मृत्यु ने उनके परिवार को वेदांता के चाइल्ड केयर सेंटर में मदद लेने के लिए मजबूर किया। हजारों बच्चों की तरह सीमांचल को बचपन, स्कूली शिक्षा, कॉलेज और रोजगार के माध्यम से वेदांता एल्युमिनियम ने सहायता दी । आज, वह इस क्षेत्र के छोटे बच्चों के लिए स्थानीय तीरंदाजी कोच हैं और उनका सपना 2024 के ओलंपिक में पदक जीतने का है।


कविता और अर्जुन नाइक दोनों पति पत्नी झारसुगुड़ा के एक छोटे से गांव से हैं। अर्जुन को चोट लगने के कारण वह काम छोड़ने के लिए मजबूर हो गया था । इसके बाद दंपति ने जमीन के एकमात्र टुकड़े पर खेती कर गुजर बसर करने का फैसला किया, लेकिन पानी की कमी ने खेती को असंभव बना दिया था। एक दिन, उन्हें स्थानीय किसानों के लिए वेदांता की जीविका समृद्धि भूमि और जल प्रबंधन परियोजना का पता चला और और इसके माध्यम से उन्होंने एक कुआं खोदा और एक सौर पंप स्थापित किया। आधुनिक कृषि विधियों के ज्ञान और वेदांता के माध्यम से बेहतर बीज और संसाधनों तक पहुंच के कारण उनकी जमीन पर अब हरी-भरी फसल लहरा रही है और अच्छी आय प्राप्त हो रही है।


बसंती किसान की कहानी ²ढ़ निश्चय और उद्यमशीलता का एक बेहतर उदाहरण है। तीन बच्चों की मां और एक युवा विधवा बसंती ने खुद को और अपने बच्चों को गरीबी से बाहर निकालने का फैसला किया। अपने गांव की महिलाओं से वेदांता की शुभलक्ष्मी सहकारी समिति के बारे में सुनकर वह सहकारिता में शामिल हो गई और एक सब्जी और किराने की दुकान स्थापित करने के लिए ऋण लिया। एक समय था जब वह नहीं जानती थी कि अगले दिन अपने बच्चों को कहां से खाना खिलाना है और आज वह औसतन 15,000 रुपये कमाती है।


गरीबी ने बुतरा कंसारी को ढोकरा की सुंदर कला को त्यागने के लिए मजबूर कर दिया था, जिसका कौशल उन्हें उनके माता-पिता और दादा-दादी से मिला था। कालाहांडी के जंगलों में बसे बुतरा जैसे ढोकरा कारीगरों के गांव की खोज करते हुए, वेदांता ने 5000 साल पुरानी कला को पुनर्जीवित करने और इस प्रक्रिया में उन्हें आजीविका प्रदान के लिए एक परियोजना शुरू की। कच्चे माल की सहायता, समकालीन डिजाइनों का प्रशिक्षण और बाजार तक आसान पहुंच बनाकर बुतरा और उनके जैसे अन्य लोगों ने ढोकरा कला को आजीविका का स्रोत बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है।


वेदांता लिमिटेड की एक डिवीजन, वेदांता एल्युमिनियम बिजनेस भारत की सबसे बड़ा एल्युमीनियमउत्पादक कंपनी है, जो वित्त वर्ष 2021 में देश के कुल एल्युमीनियम का आधा 1.97 मिलियन टन


उत्पादित कर रही है।


यह मूल्य वर्धित एल्यूमीनियम उत्पादों में अग्रणी है जिनका मुख्य उद्योगों में महत्वपूर्ण तरीेके से इस्तेमाल होता हैं। भारत में अपने विश्व-स्तरीय एल्युमीनियम स्मेल्टर, एल्यूमिना रिफाइनरी और बिजली संयंत्रों के साथ यह कंपनी एल्युमीनियम के बढ़ते इस्तेमाल को 'भविष्य की धातु' के रूप में एक बेहतर भविष्य के लिए अपने मिशन को पूरा करती है।


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  • Source
  • आईएएनएस

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